यौनिकता इन्सान होने का बहुत महत्वपुर्ण अंश है। यौनिकता केवल हमारे शरीर ही नहीं, उसके साथ हमारी समझ, विचार, स्वभाव, संस्कार, आस्था, विश्वास, शारीरिक आनन्द, इतिहास, धर्म, समाज एवं आर्थिक स्थिति का समावेश है।
सबको अपनी यौनिकता चुनने का अधिकार है क्योंकि हम सब अलग है, विभिन्न है जिसके वजह से हमारी समाज मे एक पहचान हैं। समाज को किसी की उम्र, लिंग, जाति, गोत्र, यौनिकता, धर्म के आधार पर भेद-भाव नहीं करनी चाहिए। चाहे कोई परलैंगिक, द्विलैंगिक या समलैंगिक हो इस मे शर्माने या हिचकिचाने की जरूरत नहीं होती, सभी को अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीने का जन्मसिद्ध अधिकार है।
यौनिकता शिक्षा एक व्यक्ति के युवा जीवन का एक ऐसा अंग है जिसके बिना वह अधूरा है। युवा मन मे ऐसे अनेक सवाल उठते है जिसका कोई जवाब नहीं देता और माता, पिता और शिक्षिक केवल इतना कहते है कि अभी वह बहुत छोटे है और उन्हें ऐसी बातों के बारे मे सोचना नहीं चाहिए, इस से ना तो वह कुछ समझ पाते है और बड़े होते हुए उनमे यौनिकता एवं यौन क्रिया के प्रति भय एवं जिज्ञासा उत्पन्न होती है।
युवा पीढी को जरूरत है कि उन्हें कोई यौन रोग और यौन अत्याचार के बारे मे जानकारी दे। युवक/युविकाओं को समझना होगा कि उनका शरीर केवल उनका है और किसी को भी उनसे बिना पूछे उन्हें छुने का हक नहीं है। इसके साथ ही उन्हें अपने इच्छाओं को समझना होगा और उसके परिणामों के बारें मे सोचना होगा। इसी कारण उन्हें इन विषयों पर शिक्षा मिलनी चाहेए।
यौनिकता और युवा शिक्षा साथ साथ चलते है। युवा पीढी को अपनी जिंदगी कैसे जीनी है ये उन पर निर्भर है लेकिन उन्हें अपने निश्चय का नतीजा जानना आवश्यक है।
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so honest and straightforward.
accepting of mistakes and the bluntness.
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